कामाक्षा माँ शैलेन्द्र बाबा कामधेनु सेवा संस्थान ट्रस्ट

गौ सेवा • मानव सेवा • सनातन धर्म रक्षा

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कामाक्षा माँ शैलेन्द्र बाबा कामधेनु सेवा संस्थान ट्रस्ट

गौ सेवा • मानव सेवा • सनातन धर्म रक्षा

पूज्य गुरुदेव डॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी

पूज्य डॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी

Doctor of Philosophy (मानद उपाधि) से सम्मानित
पीठाधीश्वर - कामाक्षा धाम

कूंभनाथ दरबारपरमहंस श्री कुम्भनाथजी दरबार
भरपूरनाथश्री भरपूर नाथजी महाराज
logoडॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी
भोलेनाथ जीश्री गुमानगिरि जी महाराज
गुरुदेव शैलेन्द्र नाथ जी - डमरू सहितगुरुदेव - दिव्य दर्शन
दर्शनगुरुदेव - साधना
धूणाअघोरी धूणा
मंदिरश्री हनुमानजी मंदिर
कूंभनाथ दरबारपरमहंस श्री कुम्भनाथजी दरबार
भरपूरनाथश्री भरपूर नाथजी महाराज
logoडॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी
भोलेनाथ जीश्री गुमानगिरि जी महाराज
गुरुदेव शैलेन्द्र नाथ जी - डमरू सहितगुरुदेव - दिव्य दर्शन
दर्शनगुरुदेव - साधना
धूणाअघोरी धूणा
मंदिरश्री हनुमानजी मंदिर
PhD मानद उपाधि प्रमाणपत्र - शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी
गुरुदेव

🏆 गुरुदेव का सम्मान

पूज्य डॉक्टर शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी को पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर (राज.) द्वारा Doctor of Philosophy (मानद उपाधि) से सम्मानित किया गया।

यह सम्मान हठयोग, साधना, गौ सेवा, सनातन संस्कृति के उत्थान एवं समाज सेवा में उत्कृष्ट योगदान का प्रतीक है।

📅 15 अप्रैल 2026 | 🕐 सायं 5:15 | 📍 एस.एस. मोदी विद्या विहार, झुन्झुनूं

🏅 अतिरिक्त सम्मान: Dr. Shailendra Nath Aghori Ji को Amateur Dancesport Federation of India द्वारा उनके समाज, योग, गौ सेवा एवं सनातन संस्कृति के उत्थान में योगदान हेतु सम्मानित किया गया तथा उन्हें Federation का Patron नियुक्त किया गया है।

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🕉️ पूज्य गुरुदेव Dr. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी के बारे में

एक दिव्य जीवन यात्रा

पूज्य गुरुदेव डॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी

🕉️ अघोरेश्वर पूज्य गुरुदेव डॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी

पीठाधीश्वर — कामाक्षा धाम, मुकुंदगढ़

🕉️ परिचय

एक ऐसा जीवन जिसे केवल पढ़ा नहीं, महसूस किया जाता है

गुरुदेव शैलेन्द्र नाथ जी - डमरू सहित

🌄 एक ऐसा जीवन जिसे केवल पढ़ा नहीं, महसूस किया जाता है

कुछ जीवन ऐसे होते हैं जिन्हें हम इतिहास में पढ़ते हैं, कुछ ऐसे होते हैं जिन्हें हम सुनते हैं, और कुछ ऐसे होते हैं — जिन्हें केवल अनुभव किया जा सकता है। पूज्य अघोरेश्वर गुरुदेव श्री शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी का जीवन उसी श्रेणी में आता है। यह केवल एक संत की जीवनी नहीं है, यह केवल घटनाओं का संग्रह नहीं है, यह एक ऐसी यात्रा है — जहाँ साधना, त्याग, तप, करुणा और शक्ति एक साथ प्रवाहित होती हैं। गुरुदेव का जीवन बाहरी दृष्टि से भले ही साधारण लगे, लेकिन उनके भीतर जो ऊर्जा, जो चेतना और जो आकर्षण है — वह उन्हें एक सामान्य व्यक्ति से अलग बनाता है। उनके जीवन को समझने के लिए केवल जानकारी पर्याप्त नहीं, 👉 अनुभूति आवश्यक है।

🕉️ आध्यात्मिक यात्रा

भीतर की पुकार और कामाख्या धाम

🕉️ भीतर की पुकार — जब जीवन दिशा बदलता है

हर व्यक्ति के जीवन में एक समय ऐसा आता है जब उसे भीतर से एक पुकार सुनाई देती है।
कुछ लोग उस पुकार को अनसुना कर देते हैं,
और कुछ लोग उसी के पीछे चल पड़ते हैं।
गुरुदेव ने उस पुकार को सुना —
और उसी ने उनके जीवन की दिशा बदल दी।
यह पुकार उन्हें लेकर गई उस स्थान पर,
जिसे केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि एक जीवंत शक्ति माना जाता है —
👉 कामरूप कामाख्या मंदिर
जो गुवाहाटी, असम में स्थित है।

🔱 कामरूप कामाख्या — जहाँ साधना केवल क्रिया नहीं, अनुभव बन जाती है

कामरूप कामाख्या धाम का वर्णन केवल शब्दों में करना संभव नहीं है।
यह वह स्थान है जहाँ:
तंत्र साधना की परंपरा सदियों से जीवित है
साधक अपने भीतर के भय, सीमाएँ और अहंकार को छोड़ता है
और एक नए स्तर की चेतना को अनुभव करता है
गुरुदेव ने इसी स्थान को अपनी साधना का आधार बनाया।<कामरूप /p>

🌌 एकांत की साधना — जहाँ दुनिया समाप्त हो जाती है

कामाख्या की पहाड़ियों में,
घने वातावरण में,
रात के सन्नाटे में —
जब सब कुछ शांत होता है,
तब साधक अपने भीतर उतरता है।
गुरुदेव ने वर्षों तक इसी एकांत को अपना साथी बनाया।
यह साधना:
आसान नहीं थी
आरामदायक नहीं थी
और सामान्य भी नहीं थी
यह वह मार्ग था जहाँ:
हर डर सामने आता है
हर कमजोरी प्रकट होती है
और हर सीमा टूटती है

🔥 साधना और तप

आत्म परिवर्तन की यात्रा

🔥 साधना — केवल अभ्यास नहीं, आत्म परिवर्तन

गुरुदेव की साधना केवल:
मंत्र जप
ध्यान
या पूजा
तक सीमित नहीं थी
बल्कि यह एक पूर्ण परिवर्तन की प्रक्रिया थी।
इसमें शामिल था:
शरीर का नियंत्रण
मन का नियंत्रण
इंद्रियों का नियंत्रण
और अंततः अहंकार का त्याग

🔱 अघोर — एक गलत समझा गया मार्ग

अघोर पंथ को लेकर समाज में बहुत सारी गलत धारणाएँ हैं।
लेकिन वास्तविकता यह है कि:
👉 अघोर = जो घोर नहीं है
यानी:
सरलता
सहजता
निर्भयता
अघोरी साधक:
किसी से घृणा नहीं करता
किसी को छोटा-बड़ा नहीं मानता
हर चीज़ में परम तत्व को देखता है

🧘‍♂️ गुरुदेव — अघोर का जीवंत स्वरूप

  • गुरुदेव ने अघोर को केवल समझा नहीं,
  • उसे जिया है
  • उनका जीवन:
  • बिना दिखावे का
  • बिना भेदभाव का
  • बिना डर का

🔥 तप और त्याग — एक असाधारण साधना

गुरुदेव के जीवन का एक सबसे अद्भुत पक्ष है उनका त्याग।
पिछले लगभग 15 वर्षों से:
अन्न का त्याग
जल का त्याग
पर आधारित जीवन है
यह कोई साधारण बात नहीं है।
यह एक ऐसी साधना है जो केवल:
👉 दृढ़ संकल्प
👉 आत्म नियंत्रण
👉 और उच्च साधना स्तर
से ही संभव है।

🌍 यह तप क्यों?

  • उनके निकट रहने वाले बताते हैं:
  • यह साधना केवल व्यक्तिगत नहीं है
  • यह “जगत कल्याण” के लिए है
  • साधना का गहराई वाला आयाम

🌑 साधना का गहरा आयाम

शमशान साधना, निर्भयता, अग्नि साधना

🔥 जब साधना सीमाओं को तोड़ देती है

साधना शब्द सुनने में जितना सरल लगता है,
वास्तव में वह उतना ही गहरा और कठिन होता है।
बहुत से लोग साधना को केवल पूजा, मंत्र या ध्यान तक सीमित समझते हैं,
लेकिन वास्तविक साधना उससे कहीं आगे होती है।
साधना का अर्थ है:
👉 स्वयं को बदल देना
👉 अपनी सीमाओं को तोड़ देना
👉 अपने भीतर के भय, मोह और अहंकार को समाप्त कर देना
और यही वह मार्ग है जिसे गुरुदेव ने अपनाया —
पूरी निष्ठा, पूर्ण समर्पण और अटूट धैर्य के साथ।

🌑 शमशान साधना — जहाँ सत्य सामने खड़ा होता है

अगर अघोर पंथ की सबसे गहन और रहस्यमयी साधना की बात की जाए,
तो वह है — शमशान साधना
शमशान…
जहाँ जाने से सामान्य व्यक्ति डरता है
जहाँ हर कोई दूरी बनाकर रखता है
लेकिन अघोरी साधक के लिए —
👉 वही सबसे बड़ा सत्य है
क्योंकि शमशान में:
न कोई अमीर होता है
न कोई गरीब
न कोई ऊँच
न कोई नीच
वहाँ केवल एक सत्य होता है —
👉 जीवन का अंत और आत्मा की यात्रा

🔥 गुरुदेव और शमशान साधना का अनुभव

गुरुदेव ने इस सत्य को केवल देखा नहीं,
👉 उसे जिया है
उन्होंने कई स्थानों पर शमशान साधना की —
जहाँ सामान्य व्यक्ति कुछ क्षण भी नहीं रुक सकता
रात के गहरे अंधकार में,
पूर्ण एकांत में,
जहाँ केवल शांति नहीं — बल्कि एक अलग प्रकार की ऊर्जा होती है
वहाँ साधना करना केवल साहस नहीं,
👉 एक अलग स्तर की चेतना मांगता है

🌌 शमशान क्या सिखाता है?

शमशान साधना का उद्देश्य डर पैदा करना नहीं है,
बल्कि डर को समाप्त करना है
यह सिखाता है:
जीवन अस्थायी है
शरीर नश्वर है
अहंकार व्यर्थ है
और जब यह समझ आ जाती है,
तो व्यक्ति के भीतर एक गहरी शांति जन्म लेती है

🧘‍♂️ निर्भयता — गुरुदेव की सबसे बड़ी शक्ति

गुरुदेव के व्यक्तित्व में जो सबसे स्पष्ट दिखाई देता है,
वह है उनकी निर्भयता
यह निर्भयता शब्दों से नहीं आई,
👉 यह साधना से आई है
जब कोई व्यक्ति:
मृत्यु को समझ लेता है
अकेलेपन को स्वीकार कर लेता है
और अपने भीतर उतर जाता है
तब उसे किसी चीज़ का भय नहीं रहता

🔥 अग्नि साधना — ऊर्जा का केंद्र

गुरुदेव की साधना में अग्नि का भी विशेष महत्व रहा है
अग्नि केवल जलाने वाली शक्ति नहीं है
बल्कि:
शुद्धि का प्रतीक
ऊर्जा का स्रोत
परिवर्तन का माध्यम
अघोर साधना में अग्नि के माध्यम से:
तंत्र साधना
ऊर्जा जागरण
आंतरिक शुद्धि
की प्रक्रियाएँ की जाती हैं

🏛️ मुकुंदगढ़ — सेवा की भूमि

जहाँ साधना सेवा बन जाती है

🔱 मुकुंदगढ़ — जहाँ साधना सेवा बन जाती है

  • कामाख्या की साधना के बाद,
  • गुरुदेव ने अपनी कर्मभूमि के रूप में चुना —
  • मुकुंदगढ़
  • यह केवल एक स्थान नहीं है,
  • यह एक ऐसा केंद्र है जहाँ:
  • साधना और सेवा एक साथ चलते हैं

🏛️ आश्रम — जहाँ हर व्यक्ति अपनापन महसूस करता है

मुकुंदगढ़ धाम में प्रवेश करते ही
एक अलग ही अनुभव होता है
यहाँ:
कोई औपचारिकता नहीं
कोई दूरी नहीं
कोई भेदभाव नहीं
जो भी आता है —
👉 उसे अपनापन मिलता है

🍛 अन्नपूर्णा सेवा — बिना भेदभाव के भोजन

इस धाम की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है —
👉 निःशुल्क भोजन सेवा
सुबह की चाय,
दोपहर का भोजन,
शाम का भोजन
सब कुछ यहाँ उपलब्ध है
और यह केवल व्यवस्था नहीं है —
👉 यह सेवा है
गोपी भाई द्वारा वर्षों से यह सेवा निरंतर चल रही है
लोग कहते हैं:
👉 आज तक कोई भी व्यक्ति यहाँ से भूखा नहीं लौटा

🐄 गौशाला — सेवा का जीवंत रूप

गौशाला यहाँ का हृदय है
सैकड़ों गायों की सेवा
उनकी देखभाल
उनके लिए समर्पण
यह केवल पालन नहीं है
👉 यह श्रद्धा है
दूध, दही और छाछ —
जो गुरुदेव स्वयं ग्रहण करते हैं
वही यहाँ आने वाले लोगों के लिए भी उपलब्ध है

🌿 साधना से सेवा तक का परिवर्तन

गुरुदेव का जीवन यह सिखाता है कि:
👉 साधना केवल अपने लिए नहीं होनी चाहिए
👉 साधना का परिणाम सेवा में दिखना चाहिए
और मुकुंदगढ़ धाम इसी का उदाहरण है

🌍 लोगों के अनुभव

यहाँ कुछ अलग है

🌍 यहाँ क्यों आते हैं लोग?

  • यहाँ आने वाले लोग:
  • केवल दर्शन के लिए नहीं आते
  • केवल जिज्ञासा के लिए नहीं आते
  • बल्कि वे आते हैं:
  • शांति के लिए
  • अनुभव के लिए
  • उत्तर पाने के लिए

🔥 “यहाँ कुछ अलग है”

  • लगभग हर व्यक्ति जो यहाँ आता है,
  • वह एक बात जरूर कहता है:
  • “यहाँ कुछ अलग है”
  • यह “अलग” क्या है?
  • उसे शब्दों में नहीं बताया जा सकता
  • उसे केवल महसूस किया जा सकता है

🧘‍♂️ गुरुदेव का व्यवहार — सीधा, स्पष्ट और गहरा

गुरुदेव का व्यवहार हमेशा एक जैसा नहीं होता
कभी:
बहुत सरल
बहुत प्रेमपूर्ण
और कभी:
कठोर
तीखा
लेकिन उनके निकट रहने वाले जानते हैं कि:
👉 हर व्यवहार एक शिक्षा है
रहस्य, प्रतीक और अनुभव का आयाम

🔱 प्रतीक और रहस्य

डमरू, चिलम, अग्नि — गहरे अर्थ

🔥 जब साधना प्रतीकों में दिखाई देती है

साधना हमेशा शब्दों में नहीं होती।
कई बार वह प्रतीकों के माध्यम से प्रकट होती है।
गुरुदेव का जीवन भी ऐसा ही है —
जहाँ हर चीज़ के पीछे एक गहरा अर्थ छिपा हुआ है।
जो बाहर से साधारण लगता है,
वास्तव में वह अत्यंत गहन होता है।

🔱 डमरू — सृष्टि की ध्वनि का प्रतीक

गुरुदेव के स्वरूप में अक्सर एक विशेष चीज़ देखी जाती है —
👉 उनके हाथ में डमरू
डमरू केवल एक वाद्य यंत्र नहीं है।
यह:
सृष्टि की पहली ध्वनि का प्रतीक माना जाता है
ऊर्जा के कंपन का संकेत है
चेतना के जागरण का माध्यम है
भगवान शिव के साथ जुड़ा यह डमरू
यह दर्शाता है कि:
👉 सृष्टि की हर शुरुआत ध्वनि से होती है
और साधना का उद्देश्य उसी मूल ध्वनि तक पहुँचना है

🔥 चिलम — अघोर साधना का माध्यम

दूसरे हाथ में अक्सर उनकी चिलम होती है
बहुत से लोग इसे केवल एक सामान्य वस्तु समझते हैं
लेकिन अघोर परंपरा में इसका एक गहरा अर्थ है
चिलम:
अग्नि का प्रतीक है
ऊर्जा का माध्यम है
साधना का उपकरण है
👉 यह केवल धूम्रपान नहीं है
👉 यह एक प्रक्रिया है
एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें:
साधक अपने भीतर की ऊर्जा को जागृत करता है
चेतना को केंद्रित करता है

🔱 “चिलम और कलम” — एक गहरा संकेत

जब कहा जाता है:
👉 “उनका चिलम ही उनका कलम है”
तो उसका अर्थ यह नहीं कि यह केवल एक उपमा है
बल्कि इसका गहरा अर्थ है:
जिस प्रकार एक लेखक अपने कलम से विचारों को जन्म देता है
उसी प्रकार अघोरी अपनी साधना से ऊर्जा को जन्म देता है
👉 उनका चिलम — उनकी साधना का माध्यम है
👉 उनका चिलम — उनकी अभिव्यक्ति है

🔥 अग्नि — जो बाहर भी है और भीतर भी

अघोर साधना में अग्नि का विशेष महत्व है
यह अग्नि केवल बाहर की नहीं होती
👉 यह भीतर की भी होती है
भीतर की अग्नि:
इच्छाओं को जलाती है
अहंकार को समाप्त करती है
चेतना को जागृत करती है
गुरुदेव की साधना में यह अग्नि स्पष्ट दिखाई देती है

🕉️ “मूढ़ी संत” — एक रहस्यमय पहचान

गुरुदेव को कई लोग “मूढ़ी संत” कहते हैं
यह शब्द सुनने में सामान्य लगता है
लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा है
वे किसी निश्चित नियम या ढाँचे में बंधे हुए नहीं हैं
उनका व्यवहार:
कभी अत्यंत सरल
कभी अत्यंत कठोर
कभी मौन
कभी अत्यंत प्रखर
👉 यही अघोर है
👉 यही स्वतंत्रता है

🧘‍♂️ साधना के गुप्त आयाम

गुरुदेव की साधना का बड़ा हिस्सा ऐसा है
जो किसी को दिखाई नहीं देता
वे समय-समय पर:
एकांत में चले जाते हैं
दुनिया से अलग हो जाते हैं
और उस समय वे:
गहन तंत्र साधना
मंत्र अनुसंधान
ऊर्जा साधना
में लीन रहते हैं

🙏 भक्तों के अनुभव

जीवन में परिवर्तन और आंतरिक शांति

🔮 तंत्र साधना — केवल क्रिया नहीं, विज्ञान

तंत्र को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं
लेकिन वास्तविकता में तंत्र:
👉 ऊर्जा का विज्ञान है
इसमें:
मंत्र
यंत्र
ध्यान
अग्नि
सब मिलकर काम करते हैं
गुरुदेव इस विज्ञान को केवल जानते नहीं
👉 उसे अनुभव करते हैं

🌌 महाविद्या और ऊर्जा साधना

गुरुदेव की साधना में महाविद्याओं का भी विशेष स्थान माना जाता है
महाविद्या साधना:
अत्यंत गहन
अत्यंत कठिन
और अत्यंत शक्तिशाली
मानी जाती है
यह साधना केवल ज्ञान से नहीं
👉 अनुभव से आती है

🌍 प्रभाव — जो शब्दों से परे है

गुरुदेव का प्रभाव केवल उनके धाम तक सीमित नहीं है
देश के विभिन्न हिस्सों से लोग आते हैं
और कई बार विदेशों से भी लोग उनके दर्शन के लिए पहुँचते हैं
हर व्यक्ति का अनुभव अलग होता है
लेकिन एक बात समान होती है:
👉 “कुछ अलग महसूस होता है”

🔥 अनुभव — जो समझाया नहीं जा सकता

कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं जिन्हें समझाया नहीं जा सकता
गुरुदेव का अनुभव भी ऐसा ही है
जो उनके पास बैठता है
जो कुछ समय उनके साथ बिताता है
वह महसूस करता है कि:
👉 यहाँ केवल शब्द नहीं हैं
👉 यहाँ ऊर्जा है

🧘‍♂️ व्यवहार — शिक्षा का एक अलग तरीका

गुरुदेव का व्यवहार हमेशा एक जैसा नहीं होता
वे:
डाँटते भी हैं
सिखाते भी हैं
और चुप भी रहते हैं
लेकिन हर व्यवहार के पीछे एक उद्देश्य होता है
👉 शिक्षा देना

🔱 संत परंपरा से जुड़ाव

गुरुदेव का संबंध केवल एक स्थान तक सीमित नहीं है
वे विभिन्न संत परंपराओं और साधकों से जुड़े हुए हैं
जहाँ:
विचारों का आदान-प्रदान होता है
साधना पर चर्चा होती है
और अनुभव साझा किए जाते हैं
अनुभव, परिवर्तन और प्रभाव

🔥 जब साधना केवल साधक तक सीमित नहीं रहती

एक सच्ची साधना की पहचान यह नहीं होती कि वह केवल साधक तक सीमित रहे, बल्कि यह होती है कि उसका प्रभाव दूसरों के जीवन में भी दिखाई दे। गुरुदेव का जीवन भी ऐसा ही है — जहाँ उनकी साधना का प्रभाव केवल उनके भीतर ही नहीं, बल्कि उनके संपर्क में आने वाले हर व्यक्ति के जीवन में किसी न किसी रूप में दिखाई देता है।

🌍 लोगों के अनुभव — अलग-अलग, लेकिन एक जैसा भाव

गुरुदेव के पास आने वाला हर व्यक्ति अपनी एक कहानी लेकर आता है।
कोई:
समस्या लेकर आता है
कोई दुख लेकर
कोई जिज्ञासा लेकर
और कोई केवल देखने के लिए
लेकिन जब वह वापस जाता है,
तो उसके साथ एक अनुभव जरूर होता है।
किसी के लिए वह अनुभव शांति का होता है,
किसी के लिए विश्वास का,
और किसी के लिए एक नई शुरुआत का।

🔮 “चमत्कार” — जिसे हर कोई अलग तरह से देखता है

बहुत से लोग गुरुदेव के साथ जुड़े अपने अनुभवों को “चमत्कार” कहते हैं।
लेकिन यह शब्द भी शायद पूरी तरह उस अनुभव को व्यक्त नहीं कर पाता।
क्योंकि:
👉 जो एक व्यक्ति के लिए चमत्कार है
👉 वही दूसरे के लिए एक आशीर्वाद हो सकता है
👉 और किसी तीसरे के लिए एक गहरा संयोग
गुरुदेव स्वयं इन बातों को कभी दिखावा नहीं बनाते
और न ही उन्हें प्रचार का माध्यम बनाते हैं

🌿 जीवन में परिवर्तन — धीरे-धीरे, लेकिन गहराई से

गुरुदेव के संपर्क में आने वाले कई लोगों ने यह महसूस किया है कि
उनके जीवन में परिवर्तन अचानक नहीं,
👉 धीरे-धीरे आता है
लेकिन जब आता है,
तो गहराई से आता है
यह परिवर्तन हो सकता है:
सोच में
व्यवहार में
जीवन के दृष्टिकोण में

🧘‍♂️ आंतरिक शांति — जो सबसे बड़ी प्राप्ति है

आज के समय में सबसे बड़ी कमी क्या है?
👉 शांति
हर व्यक्ति भागदौड़ में है
हर व्यक्ति तनाव में है
ऐसे समय में अगर कोई व्यक्ति कुछ समय के लिए भी
अपने भीतर शांति महसूस कर ले —
तो वही सबसे बड़ी प्राप्ति है
गुरुदेव के पास बैठकर
कई लोग इसी शांति को अनुभव करते हैं

🔱 गुरुदेव का प्रभाव — बिना प्रचार के

आज के समय में जहाँ हर चीज़ प्रचार से चलती है,
वहीं गुरुदेव का प्रभाव बिना प्रचार के फैलता है
👉 कोई व्यक्ति आता है
👉 अनुभव करता है
👉 और फिर दूसरों को बताता है
यही वास्तविक प्रभाव होता है

🌍 देश और विदेश से आने वाले लोग

समय के साथ यह प्रभाव इतना बढ़ा है कि
लोग दूर-दूर से आने लगे हैं
देश के विभिन्न राज्यों से
और कई बार विदेशों से भी
लेकिन यहाँ आने के बाद
हर व्यक्ति एक बात महसूस करता है:
👉 यहाँ कोई दिखावा नहीं है
👉 यहाँ केवल अनुभव है

🔥 कठोरता — जो वास्तव में करुणा है

गुरुदेव का एक पक्ष ऐसा भी है
जो हर किसी को तुरंत समझ में नहीं आता
वह है — उनकी कठोरता
वे कभी-कभी डाँटते हैं
कभी तीखे शब्द बोलते हैं
लेकिन जो उनके निकट रहते हैं
वे जानते हैं कि:
👉 यह कठोरता भी एक प्रकार की करुणा है
यह एक तरीका है:
👉 व्यक्ति को उसकी गलती का एहसास कराने का

🕉️ शिक्षा — बिना किताबों के

गुरुदेव की शिक्षा किसी किताब में नहीं मिलती
वह मिलती है:
उनके व्यवहार में
उनके शब्दों में
और उनके मौन में
कई बार उनका मौन ही सबसे बड़ी शिक्षा होता है

🔥 साधना का वास्तविक अर्थ

  • गुरुदेव का जीवन यह सिखाता है कि:
  • साधना केवल बैठकर ध्यान करना नहीं है
  • साधना केवल मंत्र जप नहीं है
  • बल्कि साधना है:
  • हर परिस्थिति को स्वीकार करना
  • हर व्यक्ति को समान देखना
  • और अपने भीतर की सच्चाई को पहचानना

🌌 अनुभव — जो शब्दों से परे है

  • अंत में, गुरुदेव के बारे में जितना भी लिखा जाए,
  • वह हमेशा अधूरा रहेगा
  • क्योंकि:
  • कुछ चीज़ें शब्दों में नहीं आतीं
  • कुछ चीज़ें केवल अनुभव की जाती हैं

🔚 अंतिम निष्कर्ष — एक जीवन, एक संदेश

पूज्य अघोरेश्वर गुरुदेव श्री शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी का जीवन:
तप का जीवन है
त्याग का जीवन है
सेवा का जीवन है
और सबसे बढ़कर — सत्य का जीवन है
वे केवल एक संत नहीं हैं
👉 वे एक अनुभव हैं

🕉️ अंतिम वंदना

  • “गुरु वही नहीं जो रास्ता दिखाए,
  • गुरु वह है जो स्वयं रास्ता बन जाए।”

🙏 चरण वंदना गुरुदेव 🙏

"गुरु वही नहीं जो रास्ता दिखाए,
गुरु वह है जो स्वयं रास्ता बन जाए।"

🙏 चरण वंदना गुरुदेव 🙏

🧘 संत परंपरा

मुकुंदगढ़ दिव्य धाम की पवित्र संत परंपरा

श्री गुमानगिरि जी महाराज

गिरि सन्त परम्परा को स्थापित करने का श्रेय जगद्गुरु शंकराचार्य को जाता है। शंकराचार्य के समय वैदिक धर्म के ऊपर संकट के बादल गहरा गए थे। बौद्ध, जैन कापालिक तथा कर्मकाण्ड वैदिक धर्म को चुनौती दे रहे थे। ऐसे चुनौती पूर्ण समय में शंकराचार्य ने वैदिक धर्म...

गिरि सन्त परम्परा को स्थापित करने का श्रेय जगद्गुरु शंकराचार्य को जाता है। शंकराचार्य के समय वैदिक धर्म के ऊपर संकट के बादल गहरा गए थे। बौद्ध, जैन कापालिक तथा कर्मकाण्ड वैदिक धर्म को चुनौती दे रहे थे। ऐसे चुनौती पूर्ण समय में शंकराचार्य ने वैदिक धर्म को पुनर्स्थापित किया। आदि गुरु शंकराचार्य ने वैदिक धर्म व दर्शन का घूम-घूमकर सम्पूर्ण भारतवर्ष में प्रचार-प्रसार किया। इनके द्वारा प्रतिपादित मत को अद्वैत, शंकरमत अथवा शंकर दर्शन भी कहते हैं। शंकराचार्य ने अनेक ग्रंथों का प्रणयन किया, जिनमें ब्रह्मसूत्र भाष्य, उपनिषद् भाष्य, गीता भाष्य, विवेक चूड़ामणि, प्रबोध सुधाकर, उपदेश साहस्री, अपरोक्षानुभूति, पंचीकरण, पंचदशी, मनीषापंचक, आनंदलहरी, स्तोत्र आदि प्रमुख हैं।

हिन्दू धर्म का चारों दिशाओं में प्रचार-प्रसार करने के लिए चार मठों का निर्माण करवाया और फिर उनमें अपने चार शिष्यों को नियुक्त किया। ये थे पद्मपादाचार्य (सुरेश्वर), हस्तामलक, तोटकाचार्य और पृथ्वीधराचार्य (हस्तामलक)।

तोटकाचार्य महाराज से ही गिरी सम्प्रदाय शुरू हुआ। ये गिरी नाम वाले सन्यासी पर्वतीय वनों में अथवा ऊँचे एकांत स्थान पर निवास करना उचित समझते हैं तथा पठन-पाठन एवं वेदांत साहित्य के अध्ययन में इनकी गहन रुचि होती है।

गुमानगिरी जी उच्च कोटि के सन्त थे। ऐसे सन्त जिनमें जीवन का परम लक्ष्य ईश्वर साधना थी। लौकिक ऐषणाओं से परे रहकर वे जगत कल्याण के महती भाव से तप साधना में अपना समय व्यतीत करते थे। लोगों का कहना है कि वे जाति से जोगी थे और मुकुन्दगढ़ ग्राम के प्रथम सन्त थे जिन्होंने मुकुन्दगढ़ को अपनी साधना स्थली के रूप में चुना। इनके जन्म स्थान के विषय में कोई विशेष जानकारी नहीं मिल पाई है। मुकुन्दगढ़ में गोपीनाथ जी के मंदिर के पीछे कई कोटरियाँ बनी हुई थी, उनमें वे निवास करते थे। इनके मुख से जो भी निकल जाता था वह सत्य हो जाता था। उस जमाने में इनके आवास के क्षेत्र को मंडी कहा जाता था। नगर सेठ गणेश नारायण चौधरी का इनके पास बहुत आना-जाना था। एक किंवदंती है कि वे रात्रिकाल में अपने शरीर को छोड़कर सिंह का रूप धारण कर लिया करते थे। एक रात जब गणेश नारायणजी इनके दर्शनों के लिए आए तो उन्होंने देखा कि महाराज की कोठरी में एक सिंह बैठा है। गुमानगिरीजी ने सोचा कि मेरे रूप को देखकर गणेशनारायण डर न जाए इसलिए वे तुरंत ही सिंह के रूप को छोड़कर अपने असली रूप में आए और सेठ गणेश नारायण जी को चेतावनी देते हुए कहा कि रात्रिकाल में मेरी कोठरी में मत आया करो नहीं तो कुछ भी अनिष्ट हो सकता है। आश्विन बदी अमावस को उन्होंने अपने शरीर का त्याग कर दिया। जिस स्थान पर उनको समाधि दी गयी उस स्थान पर उनकी स्मृति में एक छतरी भी बनी हुई है। उनकी पुण्यस्मृति में प्रतिवर्ष आश्विन बदी अमावस को मेला भरता है जहाँ हजारों की संख्या में लोग जाते हैं।

भोलेनाथ जी

श्री कूंभनाथ जी महाराज

नाथ सम्प्रदाय भारत की परम प्राचीन, उदात्त, उच्च-नीच की भावना से परे एवं अवधूत योगियों का सम्प्रदाय है। इसका आरंभ आदिनाथ भगवान शंकर से हुआ है। इसका वर्तमान रूप देने वाले योगाचार्य बालनाथ जी गोरखनाथ हैं, जिन्हें स्वयं रूद्र का अवतार माना गया है। राजस्थ...

नाथ सम्प्रदाय भारत की परम प्राचीन, उदात्त, उच्च-नीच की भावना से परे एवं अवधूत योगियों का सम्प्रदाय है। इसका आरंभ आदिनाथ भगवान शंकर से हुआ है। इसका वर्तमान रूप देने वाले योगाचार्य बालनाथ जी गोरखनाथ हैं, जिन्हें स्वयं रूद्र का अवतार माना गया है।

राजस्थान में शेखावाटी क्षेत्र के अन्तर्गत इस नाथ सम्प्रदाय के कई संत हुए जिनकी संत परम्परा आज भी शेखावाटी क्षेत्र में वटवृक्ष के रूप में फलती-फूलती है।

नाथ सम्प्रदाय 12 पंथ में विभक्त है : सत्यनाथ, धर्मनाथ, दार्शनाथ, आईपनाथ, गंगनाथ, कपिलनाथ, जालंधरनाथ, पावनाथ, पागलनाथ आदि। इस सम्प्रदाय में उच्च कोटि के सिद्ध पुरुष हुए हैं जिन्होंने अपनी सिद्धियों के बल पर सारे जगत को आश्चर्यचकित कर दिया और तंत्र विद्या को नया आयाम दिया। सबसे महत्वपूर्ण बात तो यह है कि भारतवर्ष की सबसे सिद्ध संत परम्परा माने जाने पर भी इसे धर्मांध तंत्र नहीं कहा जा सकता। संतों को "अवधूत" मानकर अपनाने वाली यह परम्परा आज निरन्तर देश के सामाजिक उत्थान में लगी हुई है। इसी नाथ परम्परा में कूंभनाथ जी महाराज हुए, जो सिद्धान्त के अवधूत थे। वे गोपालपुर गांव जो बीकानेर रियासत में है, से 1923 में मुकुन्दगढ़ आए थे। शुक्ल पक्ष में वे गोरखनाथियों की बस्ती में रहते थे। बाद में उन्होंने मुकुन्दगढ़ के श्मशान घाट के निकट अपना आश्रम बना लिया। 30 वर्ष वहीं रहकर 1953 में समाधि ले ली। आ ज इनके आश्रम को "कूंंभ जी दरबार" के नाम से जाना जाता है। जन-मानस का इस पावन-स्थली के प्रति अगाध श्रद्धा है। जाति-पांति, धन और धर्म की संकीर्णता छोड़ कर कोई भी संत के आंगन में प्रवेश पा जाता है। ऐसे ही भाव कूंभ जी में प्रकट हुए। सब बंधनों से मुक्त होकर प्रभु को हृदय में धारण किए रहते थे। गीता में कहा गया है—

यहच्छलाम्रजुर्यं दम्भोत्यतिर्विमत्सरः।
समः सिद्धावसिद्धौ च कृत्वापि न निबध्यते॥

राग-द्वेष आदि इन्द्रियों से ऊपर उठकर मनुष्य समभाव में स्थित हो जाता है तथा उसे न किसी से द्वेष रहता, न कोई कामना ही सताती है। वह निष्काम कर्मयोगी नित्यतृप्त होता है और सुख-दुःख में समान रहता है।

कूंभनाथजी महाराज नाथ सम्प्रदाय के अवधूत थे। इस सम्प्रदाय में ईश्वर से सीधे साक्षात्कार करना ही साधना की सर्वोत्तम विधि मानी जाती है। परंतु साधु के लिए साधना की विधि तथा तत्त्वज्ञान को त्याग करके ऐसी पद्धति से साधना करना बहुत कठिन है परंतु इसके द्वारा साधक शीघ्र ही शिव स्वरूप हो जाता है। इसलिए अन्य साधनों से उत्तम भी है। इस साधना में शिव का साक्षात्कार करना चाहिए तथा साथ ही शिव की क्रियाशीलता स्वरूप में ही यह साधना होती है। अपनी इसी शैली मुकुन्दगढ़ के श्मशान घाट को अपनी साधना-स्थली चुनी। इस साधना में साधक को सभी प्राणियों के प्रति भेदभाव रहित रहना पड़ता है। किसी भी वस्तु के प्रति ग्लानि नहीं रहती। कूंभ जी पशुओं से भी भेदभाव नहीं रखते। श्मशान में इस पद्धति में निषिद्ध खाद्य जल का उपयोग केवल पीने के लिए किया जाता है वह भी अशुद्ध नहीं रहता। समस्त शास्त्र सद्वत कार्य इस साधना में सिद्ध है। इस प्रकार का कठिन कार्य साधक को अपना पड़ता है। ठीक यही मार्ग कूंभजी ने अपनाया और साधना में रत हो गए।

कूंभनाथ जी को भोजन आदि से बहुत शौक था। भगवद्भक्ति जी रोटी की बहुत ही महिमा बताते थे। आज उनकी कृपा से यह परम्परा हर तरह से यशस्वी है। भोजन करते समय इनके साथ कोई व कुष्ठी भी खाते थे। आपका आचरण अद्भुत स्वरूप होते हुए भी जीवनयापन में किसी को भी कष्ट नहीं होता था। हिन्दू शास्त्र में इस प्रकार के योगी को साक्षात शिव स्वरूप माना गया है।

लोगों ने उनके प्रति अपनी हृदय की अगाध श्रद्धा व्यक्त कर पूर्ण-भक्त अर्पित किया। छाछ, मठ्ठा, गाजर, मूली, बाजरे की रोटी आपके प्रिय भोजन थे।

मुकुन्दगढ़ के ठाकुर बाघसिंह जी उनको बहुत मानते थे तथा उनके आश्रम पर जाते थे। कूंभ जी को "दरबार" की उपाधि दी गई है। वह बहुत बारादरी जी के द्वारा दी गई है। वे बहुत कहा करते थे मुकुन्दगढ़ के दरबार कूंभनाथ जी महाराज हैं। वे नहीं। गंगारामजी दुर्गीया तथा गंगारामजी दुर्गी के साथ कई समयकालीन महानुभाव महाराज के साथ जुड़े हैं जो आज भी मुकुन्दगढ़ की जनता में चर्चित है। उनके समाधि स्थल पर एक भव्य मंदिर बना हुआ है, जिसका निर्माण ग्रामवासियों ने करवाया है। कूंभनाथ जी की बरसी बड़े धूमधाम से मनाई जाती है। उस दिन पूर्व रात्रि का जागरण होता है तथा दूसरे दिन खीर-भोग के लिए आता है तथा मेला भरता है।

कूंभनाथ दरबार

श्री भरपूरनाथ जी महाराज

फतेहपुर में नाथ सम्प्रदाय का एक आश्रम है जिसे अमरदास आश्रम के नाम से जाना जाता है। इस आश्रम का मुख्य उद्देश्य लोक कल्याण और नाथ परम्परा का संवर्धन है। इस उद्देश्य से नाथ सम्प्रदाय के सिद्ध सन्तों का यहाँ दर्शन होता है। भरपूरनाथ जी इसी मंगल उद्देश्य क...

फतेहपुर में नाथ सम्प्रदाय का एक आश्रम है जिसे अमरदास आश्रम के नाम से जाना जाता है। इस आश्रम का मुख्य उद्देश्य लोक कल्याण और नाथ परम्परा का संवर्धन है। इस उद्देश्य से नाथ सम्प्रदाय के सिद्ध सन्तों का यहाँ दर्शन होता है।

भरपूरनाथ जी इसी मंगल उद्देश्य की एक कड़ी थे। इनका स्वभाव बड़ा ही मधुर था। शिक्षा में जो ऊँचा-ऊँचा मिलता था उसी को स्वीकार निर्वाह करते थे। वे बहुत विद्वान थे और वहीं लोगों को नाथ सम्प्रदाय के सिद्धान्त, वेदांत बातें, गीता इत्यादि पर उपदेश दिया करते थे। मुकुन्दगढ़ में ज्येष्ठ बदी नवमी को इनका स्वर्गवास हो गया। आज प्रतिवर्ष इनकी पुण्यतिथि पर ब्रह्म बगीची में मेला भरता है। इनकी स्मृति में आज यहाँ एक भव्य मंदिर भी बना हुआ है।

भरपूरनाथ

पूज्य गुरुदेव शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी

पूज्य गुरुदेव शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी

कामांक्षा माँ के कृपा पात्र। माँ कामाख्या सिद्ध शक्तिपीठ असम से मुकंदगढ़ तक का दिव्य सफर। तप साधना से चमत्कार। धाम को "कामांक्षा माँ शैलेन्द्र बाबा कामधेनु सेवा संस्थान ट्रस्ट" के रूप में स्थापित किया। नवंबर 2006 में ट्रस्ट पंजीकृत।

✨ 🔱 पूज्य डॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी – परिचय

पूज्य संत श्री 1008 डॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी महाराज एक ऐसे दिव्य संत हैं, जिन्होंने अपनी साधना, सेवा और समर्पण से समाज में एक विशेष पहचान बनाई है। वे आध्यात्मिक साधना, गौ सेवा, मानव सेवा तथा सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार में निरंतर कार्यरत हैं।

🔱 आध्यात्मिक पहचान

गुरुदेव अघोर पंथ एवं नाथ संप्रदाय से जुड़े हुए माने जाते हैं। वे माँ कामाख्या, भगवान शिव, भैरव, बगलामुखी, धूमावती, काली एवं अन्य महाविद्याओं के साधक हैं। वे हठयोग साधना, तंत्र साधना, अनुष्ठान, जप-तप एवं आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए विख्यात हैं। उनकी साधना में सनातन शक्ति स्वरूपों की स्पष्ट झलक देखने को मिलती है।

🐄 गौ सेवा एवं ट्रस्ट

गुरुदेव "कामाख्या माँ शैलेन्द्र बाबा कामधेनु सेवा संस्थान ट्रस्ट" के माध्यम से समाज सेवा के महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। इस ट्रस्ट द्वारा—

  • ✔ गौशाला संचालन
  • ✔ गौ सेवा एवं संरक्षण
  • ✔ बीमार एवं असहाय गायों की देखभाल
  • ✔ चारा एवं भोजन सेवा
  • ✔ धार्मिक एवं सामाजिक आयोजन

निरंतर किए जा रहे हैं।

❤️ मानव सेवा

गुरुदेव ने समाज के लिए अनेक सेवा कार्य किए हैं, जिनमें प्रमुख हैं—

  • ✔ गरीब एवं जरूरतमंदों की सहायता
  • ✔ स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन
  • ✔ भंडारे एवं सेवा कार्य
  • ✔ सामाजिक उत्थान के प्रयास

उनका जीवन "सेवा ही धर्म है" के सिद्धांत पर आधारित है।

🏥 स्वास्थ्य सेवा अभियान

गुरुदेव के सानिध्य में Acupressure, Natural Therapy एवं Physiotherapy Camp का सफल आयोजन किया गया। इस सेवा कार्य के लिए उन्हें प्रशंसा एवं अभिनंदन पत्र भी प्रदान किया गया। यह अभियान राजस्थान स्वास्थ्य सेवा से जुड़ा हुआ है।

🎓 मानद उपाधि (Doctorate)

गुरुदेव को Pandit Deendayal Upadhyaya Shekhawati University, Sikar द्वारा Doctor of Philosophy (Honoris Causa) की मानद उपाधि प्रदान की गई।

यह सम्मान उन्हें उनके—

  • ✔ हठयोग साधना
  • ✔ गौ सेवा
  • ✔ सनातन संस्कृति उत्थान
  • ✔ समाज सेवा

के उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया गया।

💃 खेल एवं सांस्कृतिक योगदान

Amateur DanceSport Federation of India (ADSTI) द्वारा गुरुदेव को—

  • 🏅 Certificate of Honour
  • 👑 Patron of Dancesports India

की मानद उपाधि प्रदान की गई। उन्होंने योग, खेल एवं संस्कृति के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साथ ही National Breaking Championship 2025-26 में भी उन्हें सम्मानित किया गया।

🎤 मुख्य अतिथि एवं सम्मान

गुरुदेव को कई राष्ट्रीय एवं सामाजिक कार्यक्रमों में आमंत्रित किया गया—

✔ Chief Guest:

  • • National Breaking Championship
  • • Dance Sports Championship
  • • Bollywood Freestyle Championship

✔ Guest of Honour: Smt. Gomati Devi PG College, Bargaon

🏫 शिक्षा एवं सामाजिक सम्मान

  • ✔ Mukundgarh Public School द्वारा सम्मान
  • ✔ समस्त निजी कॉलेज संघ, झुंझुनूं द्वारा अभिनंदन
  • ✔ पशुपालन विभाग, झुंझुनूं द्वारा सम्मान

🏅 अन्य प्रमुख सम्मान

गुरुदेव को अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया, जैसे—

  • ✔ उत्कृष्ट सेवा सम्मान
  • ✔ भामाशाह सम्मान
  • ✔ जाट प्रतिभा सम्मान समारोह
  • ✔ नागरिक अभिनंदन
  • ✔ सनातन समाज सम्मान
  • ✔ Anna Foundation सम्मान
  • ✔ Indian Dental Association Jhunjhunu Branch
  • ✔ Needybridge Mahila Anath Ashram

🌍 समाज में पहचान

गुरुदेव को समाज में विभिन्न रूपों में सम्मान दिया जाता है—

  • 🔱 सिद्ध संत
  • 🔱 गौ सेवक
  • 🔱 धर्म रक्षक
  • 🔱 जनसेवक
  • 🔱 आध्यात्मिक मार्गदर्शक

✨ विशेष योगदान

  • ✔ आध्यात्मिक साधना
  • ✔ गौ सेवा
  • ✔ मानव सेवा
  • ✔ स्वास्थ्य सेवा
  • ✔ खेल एवं युवा प्रेरणा
  • ✔ सनातन संस्कृति प्रचार
  • ✔ शिक्षा एवं मार्गदर्शन
  • ✔ धार्मिक अनुष्ठान

🙏 निष्कर्ष

संक्षेप में, पूज्य संत श्री 1008 डॉ. शैलेन्द्र नाथ अघोरी जी महाराज एक ऐसे महान संत हैं, जिन्होंने आध्यात्मिक साधना, गौ सेवा, मानव सेवा, स्वास्थ्य सेवा, खेल, शिक्षा एवं सनातन धर्म के उत्थान हेतु अपना जीवन समर्पित किया है। उनके इस महान योगदान के लिए उन्हें अनेक राष्ट्रीय, सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं द्वारा सम्मानित किया गया है। 🔱🙏

🕉️ गुरुदेव के बारे में →

🛕 मंदिर

कामाक्षा धाम के पवित्र मंदिर

मंदिर

श्री हनुमानजी मन्दिर

धाम परिसर में भव्य मंदिर।

दरबार

श्री कुम्भनाथजी दरबार

सिद्ध साधक की दिव्य समाधि।

समाधि

श्री भरपूर नाथजी

अलौकिक शक्तियों से जनकल्याण।

धूणा

अघोरी धूणा

अखंड ज्योति प्रज्ज्वलित।

धूणा

गुमानगिरि बाबा

तप साधना का पवित्र स्थल।

द्वार

मुख्य द्वार

कामाक्षा धाम प्रवेश।

बगीची

ब्रह्म बगीची

प्राचीन वृक्ष पूजा स्थल।

भंडार

भण्डार घर

धाम का सेवा कक्ष।

देवी

भैरोनाथ जी

देवी पूजा स्थल।

🛕 आरती एवं पूजा समय

🌅

सुबह की आरती

मंगल आरती
🕐 प्रातः 5:30 - 6:30

🌇

शाम की आरती

संध्या आरती एवं भजन
🕐 सायं 6:30 - 7:30

🔱

गुरुवार विशेष

जीवित समाधि पर अर्जी
(5 बृहस्पतिवार अर्जी)

🐄 गौशाला

नाथ गौशाला - गौ माता की सेवा

गौ रक्षा - एक हिन्दू होने का फर्ज

"गाय माता कि सेवा ही नहीं रक्षा करना, एक हिन्दू होने का फर्ज है।"

नाथ गौशाला मुकंदगढ़-झुंझुनू (राजस्थान)। 15.11.2006 को पंजीकृत। संख्या: 1/2007। गौ-माता में 33 कोटि देवी देवता निवास करते हैं।

"गौशाला नहीं उपाय, एक हिन्दू एक गाय"

🐄 गौ सेवा में सेवा करें
गौ सेवा
गौ माता
गौशाला

🌳 कुम्भ दरबार बगीची

हजारों दुखी लोग आते हैं, कृपा से कष्ट दूर। पर्यावरण संरक्षण।

🐦 जीव-जंतु सेवा

पक्षियों के दाना-जल। 51 नए परिंडे।

🍚 अन्नपूर्णा रसोई

प्रतिदिन निःशुल्क भोजन प्रसाद।

📅 कार्यक्रम

📅 आगामी

नागरिक अभिनन्दन समारोह

Doctor of Philosophy (मानद उपाधि)

📅 15 अप्रैल 2026 | 📍 झुन्झुनूं

🔱 नियमित

गुरुवार अर्ज़ी

6 गुरुवार में मनोकामना पूर्ण।

🎉 वार्षिक

अश्विन बदि अमावस्या मेला

प्रतिवर्ष हज़ारों श्रद्धालु।

🙏 नियमित

अन्नपूर्णा रसोई

प्रतिदिन निःशुल्क भोजन।

🐄 विशेष

गौ-पूजा एवं हवन

विशेष दिनों पर गौपूजा।

🌿 सेवा

वृक्षारोपण अभियान

पर्यावरण संरक्षण।

💰 सेवा करें

राशि पर क्लिक करें → UPI से तुरंत भुगतान

खर्चा — जय गऊमाता की

✅ धारा 80G छूट | URN: AABTM7746CF20211

WhatsApp से सेवा करें

🏦 बैंक विवरण

AXIS BANK - Mukundgarh

A/c: 916010027610665 | IFSC: UTIB0001189

SBI - Mukundgarh

A/c: 61014241084 | IFSC: SBIN0031740

SBI - Siliguri

A/c: 61137396173 | IFSC: SBIN0031744

SBI (FCRA) - New Delhi

A/c: 40131125740 | IFSC: SBIN0000691

Bank of Baroda

A/c: 16330100004518 | IFSC: BARB0CHURIC

QR कोड

UPI: 9828754160@SBI

📂 प्रमाणपत्र

सम्मान पत्र

Certificate of Honour

TAN प्रमाणपत्र

TAN प्रमाणपत्र

PhD सम्मान

Doctor of Philosophy

बैंक विवरण

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PAN: AABTM7746C | NGO: RJ/2019/0247529 | CSR: CSR00036666 | 80G: AABTM7746CF20211

🏢 CSR Partnership

CSR No: CSR00036666

✅ 10A
✅ 12A
✅ TAN
✅ ISO
✅ CSR
✅ 80G
✅ NGO
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पता

कामाक्षा माँ शैलेन्द्र बाबा कामधेनु सेवा संस्थान ट्रस्ट,
कुम्भनाथ जी दरबार, ब्रह्म बगीची,
मुकुंदगढ़, झुंझुनू, राजस्थान - 333705

WhatsApp / मोबाइल

WhatsApp: 9828754160

Mobile: 9828754160

📝 संपर्क फॉर्म

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गौ सेवा • मानव सेवा • सनातन धर्म रक्षा

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🙏 धन्यवाद 🙏

आपकी सेवा सफलतापूर्वक प्राप्त हुई है।

गौ सेवा और मानव सेवा में आपका अमूल्य योगदान सराहनीय है।

जय गऊ माता 🙏 हर हर महादेव 🔱